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इत्तेफाक

इत्तेफाक महज इत्तेफाक से तो नहीं होते
कुछ तो इस जहां से इनके अलग उसूल होते
जिन्होंने मोड़े थे बड़ी नजाकत से रास्ते
आज एक अजनबी वही चांद लेकर फिर लौटे

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