जेन z को समझना थोड़ा मुश्किल है डाटा के ढेर पर बैठे , समय माकूल नहीं शिक्षा का गिरता स्तर और बाजारीकरण रोजगार का इससे कोई मेल नहीं आम और खास की सोच में अंतर बढ़ते - बढ़ते संवेदना हुई छूमंतर निराशाओं के भंवर में झूलता युवा हाय रे ! देखो अब कोकरोच हुआ।।