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Representation in democracy

Now we can also say that we have a representation in democracy. Saale Sahab Hansraj Sidh's wife got elected from ward No. 26 of Sardarshahar Municipal Council. Congratulations and best of luck 💐
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Eleventh Punyatithi

"Gone from sight, but never from the heart.” On 11th Punyatithi Naman🙏🙏

अमीरी -गरीबी का समानता

अमीरी और ग़रीबी में एक समानता है और वह यह कि मौत सबको आती है। यह उद्धरण आई.जे. नाहल साहब की पुस्तक गुस्ताखियां से है। नाहल साहब व्यक्तित्व, ज्ञान , लेखन और अभिव्यक्ति की कला की दृष्टि से इस दुनिया के एक अमीर इंसान थे। मेरा उनके घर हिसार जाना-आना पूरे मेरे पांच साल के इंजीनियरिंग कोर्स के दौरान रहा।  अन्तिम बार वर्ष 2019 में मैं एल्यूमनाई गेट-टुगेदर में जाते समय उनसे मिलकर कुरुक्षेत्र गया था। उनका लिखने का क्रम तब भी जारी था। वह एक अच्छे वक्ता थे। उनका स्नेह मुझ पर हमेशा बना रहा। आजकल तो पत्र कोई लिखता नहीं इसलिए मैंने उनके द्वारा 2004-2005 में भेजा गया एक बहुत ही सुन्दर लेखनी वाला पत्र आज भी संभाल कर रखा है। लगभग 93 की उम्र में उनका जाना मेरे लिए एक लेखन के लिए प्रेरणास्रोत का जाना व्यक्तिगत क्षति और दुखद है।  भगवान उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करें और पूरे नाहल परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे। उनके द्वारा लिखित कुछ व्यंग्योक्तियां/ उक्तियां साझा कर रहा हूं,जो हमारा मार्गदर्शन करेंगी।

रघुनाथ विद्यालय छात्रावास की यादों से

हमारी पीढ़ी ने बहुत परिवर्तन देखे हैं और काफी संघर्ष भी किया है। हमारे सामने रोजगार के अवश्य ज्यादा अवसर थे आज के मुकाबले। हालात काफी खराब थे , स्कूल भी धर्म शालाओं में चलते थे, हमने स्कूल में अध्यापकों की काफी मार खाई है। मेरे प्राथमिक स्कूल में तो एक ही गुरुजी होते थे और वह गुंदी की ताजा टहनी से पिटाई करते थे और हमने उनकी रोटियां भी बनाई हैं। इसी तरह हमने कभी पैदल तो कभी ऊंट पर यात्राएं की हैं। बारात में भी ऊंट पर गए हैं। बारात में घी-चावल या हलवा, बस यही मीठा, और दाल या चने का पटोलिया, यही नमकीन, खाकर भी अपने आप को बहुत खुशकिस्मत महसूस किया है। यह कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि बारात में जाने के लिए घरवालों से जुगत भिड़ाने की कोशिश भी करते थे। उसके बाद बारात बड़ी बसों मैं जाने लगी और दूल्हा अलग से एक जीप में जाया करता था। शादी की कोई उम्र नहीं होती थी। 18 या 21 वर्ष वाला फार्मूला बाद में आया है। गांव में किसी के यहां जमाई आता था तो खूब महिलाएं इकट्ठी होती थी और दूल्हे की पूरी रैगिंग करती थीं। असल में महिलाओं का उद्देश्य जमाई की क्षमता और बुद्धि परीक्षण होता था। सवाल काफी जटिल मस...

कुलदीप व्यास को जैसा मैं समझ पाया

कुलदीप हमारी कक्षा के दस प्रमुख होनहार छात्रों में से था। वह हमेशा से ही सांस्कृतिक गतिविधियों में सबसे आगे था। मुझे याद आता है, एक बार रघुनाथ विद्यालय (मीडिल स्कूल बिल्डिंग में) एक लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। उसमें मैंने भी भाग लिया था और मैं तीन स्थानों में नहीं आया था। कुलदीप उसमें द्वितीय आया था और माला बोझमानी प्रथम आई थी। तब से ही मुझे एहसास हो गया था कि अभिव्यक्ति के मामले में मैं उसके सामने कहीं नहीं टिकता। वह छात्रावास में नियमित रूप से आता रहता और खासतौर पर उसका मल्लूराम से विशेष लगाव था। हालांकि वह सबको समझने और उसमें सबसे सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखने की कला है। मुझे रतनगढ़ को असली जानने का मौका समय- समय पर मिलता रहा। स्कूल के दिनों मैं बंशीधर जी शर्मा (स्टेट स्कूल के हेडमास्टर), रतनलाल जी जोशी ( रघुनाथ में बैग वाले), गोपालकृष्णजी शर्मा (रेल्वे बुक स्टाल वाले)से सबसे ज्यादा प्रभावित था। सेवाकाल के दिनों में यह जानने का मौका मिला कि चम्पा लाल जी उपाध्याय, धनाधीश जी वैद्य का रतनगढ़ के शिक्षा और सामाजिक जीवन में एक विशेष महत्व व छाप है। उस समय मैं सोचा करता था कि क्या हम ...

चीनी का भाव

गन्ना गया एथेनॉल में चीनी भाव चढ़े चोटी वाहन हुए कबाड़ अब मरम्मत खींचे लंगोटी विदेश से चीनी मंगाना बक- बक‌ करना झूठी वाह रे! नीति निर्माताओं कैसे होगी‌ दीवाली मीठी।।

रघुनाथ विद्यालय छात्रावास की यादों से

रघुनाथ विद्यालय छात्रावास की यादों से ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना....यह मुकद्दर का सिकंदर गाने का एक अंतरा है। गाना पुराना है और आज के जेन-जी के जमाने में तो जितना यह गाना धीमा है, उतने समय में तो लोग साथी ही बदल डालें। जिसे रघुनाथ विद्यालय छात्रावास की कॉरिडोर में अक्सर सुना जाता था। हालांकि मेरी आवाज उतनी सुरीली नहीं है जितनी यह उस कॉरिडोर में सुनी जाती थी, क्योंकि गाने वाला कोई और था, जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। यह गाना कोई बाथरूम में भी नहीं गया जाता था। यह गाना सुनाई देने का मतलब यह था कि अब किसी न किसी के ऊंगली( In modern time poke) किया जाएगा। यह उस हॉस्टल मेट की ही विशेषता थी कि पढ़ाई में बढ़िया होने के साथ-साथ वह बुली (Bully) भी बेहतरी से कर लिया करता था। यह उस विद्यार्थी की विशेष योग्यता थी जो उसे दूसरों से अलग बनाती थी। हालांकि उसके साथ एक उत्प्रेरक भी हर समय जुड़ा रहता था। जब भी रासायनिक क्रिया को धीमा या तेज करना होता था वह उत्प्रेरक स्वयं प्रेरित हो जाता था। आज यूं ही बैठे उस मूल तत्व और उत्प्रेरक की याद आ गई।आशा है आप लोगों को भी कुछ याद आए या आपके साथ भी क...