भानीपुरा के दिनों में खेतों बीच घूमने का आनंद बुकलसर रोड़ पर पशुओं के टोकरों की रुनझुन अब शहर की सड़कों पर रातों में कोलाहल,सुबह सुनापन इतना सा सूकून है सामने के मंदिर में भोर में टनटन।।
कभी थे टेडी के चर्चे अब टेडी वाले बने हैं भालू सर्दी के जाते ही निकला ऐपस्टिन वाला गर्म आलू देश चाहे कोई हो सब तरफ एक से चालू बालक -नारियां बीते एकसी चाहे साधवी हो या घरेलू।
मार्क्स (निशान ) ही रह गये टली चला गया बीबीसी का भारत में स्थायी चेहरा बनकर रह गया चमड़ी सफेद थी पर भारत में घुल गया मिट्टी से लगाव करके इंग्लैंड को भूल गया लेखन और पत्रकारिता में पदम रत्न पा गया रत्नों का यह खजाना कल दिल दुखा गया।। ऊं शांति /RIP