कुलदीप हमारी कक्षा के दस प्रमुख होनहार छात्रों में से था। वह हमेशा से ही सांस्कृतिक गतिविधियों में सबसे आगे था। मुझे याद आता है, एक बार रघुनाथ विद्यालय (मीडिल स्कूल बिल्डिंग में) एक लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। उसमें मैंने भी भाग लिया था और मैं तीन स्थानों में नहीं आया था। कुलदीप उसमें द्वितीय आया था और माला बोझमानी प्रथम आई थी। तब से ही मुझे एहसास हो गया था कि अभिव्यक्ति के मामले में मैं उसके सामने कहीं नहीं टिकता। वह छात्रावास में नियमित रूप से आता रहता और खासतौर पर उसका मल्लूराम से विशेष लगाव था। हालांकि वह सबको समझने और उसमें सबसे सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखने की कला है। मुझे रतनगढ़ को असली जानने का मौका समय- समय पर मिलता रहा। स्कूल के दिनों मैं बंशीधर जी शर्मा (स्टेट स्कूल के हेडमास्टर), रतनलाल जी जोशी ( रघुनाथ में बैग वाले), गोपालकृष्णजी शर्मा (रेल्वे बुक स्टाल वाले)से सबसे ज्यादा प्रभावित था। सेवाकाल के दिनों में यह जानने का मौका मिला कि चम्पा लाल जी उपाध्याय, धनाधीश जी वैद्य का रतनगढ़ के शिक्षा और सामाजिक जीवन में एक विशेष महत्व व छाप है। उस समय मैं सोचा करता था कि क्या हम ...