Skip to main content

दास्तान-ए-शायरी

लिखना तो एक सफर है
जिसमें पब्लीशर हमराही हैं
मिलकर चलते- चलते
जिस मोड़ पर शब्द
लिपटते सुनहरी स्याही हैं
तब जाकर दास्तान कोई
बनती सुन्दर व स्थाई है।

Comments