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खुशबू से

खुशबू का काम है महकाना
लोगों का काम है महकना
ऐ खुशबू रोज उस राह से गुजरना
जिधर रहती है तेरी तृष्णा
तेरा नुकसान कुछ ना होना
नामुमकिन है खुशबू को पकड़ना
पर राह का निश्चित है महकना।।

- मोहन सरदारशहरी

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