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चानू ने चांदी दिलाई

चानू ने चांदी दिलाई पुरानी‌‌ कहावत जुबां पर आई "आज चांदी हो गई।" अब सोने पर नजरें टिक गई टोक्यो में हमारे "तमगों की पेट्टी खुल गई" तीर , तलवार , भाला,शूटिंग सबकी धार तेज हो‌ गई आगाज की ही बात होती है वरना‌ हर‌ दिन के बाद रात होती है।

शायरों की महफिल

कभी शायरों की महफिल में आकर तो देखो रंजो गम के दरिया में भावनाओं की नाव को दरिया के उस पार बैठी दुल्हन के घूंघट को नजरों को नजाकत से उठाते हुए तो देखो।।

सौदागर

अब मैं उन हवाओं का सौदागर हूं जो बीते मौसम साथ लाती हैं घर ,खेत, बाग-बगीचे तो क्या अब बाजारों की रौनकें भी रास नहीं आती हैं तुझसे बिछड़ कर ही यह जाना नजदीकियां कितना दुख पहुंचाती हैं दिन की रोशनी अब तेरा अक्स नहीं रातें भी डायन बन‌ कर बहुत डराती‌ हैं भूल गए दुनिया वाले तेरी जो बातें  मुझे वो ही बातें हर पल याद आती हैं।।

दास्तान-ए-शायरी

लिखना तो एक सफर है जिसमें पब्लीशर हमराही हैं मिलकर चलते- चलते जिस मोड़ पर शब्द लिपटते सुनहरी स्याही हैं तब जाकर दास्तान कोई बनती सुन्दर व स्थाई है।

समय के संकेत

देर से सोना देर से उठना रात में खटपट करते रहना है इशारा अब समय निकला अपना। स्वाद से ज्यादा पाचन का रोना सुबह दूध छोड़ छाछ का पीना सब्जियों में लौकी को तरजीह देना है इशारा अब ...

कुत्ते की खुजली,अंधे की लाठी

एक तरफ कुत्ते की खुजली राम ही जाने कितनी गहरी दूसरी तरफ अंधे की‌ लाठी जो चिल्लाये उस पर भारी बहस‌ चले बस मूत्र ‌चिकित्सा और बचे हुए गाएं राग दरबारी हाय‌! राम ये कैसी दुश्वार...

धै तेरे की

कभी होती थी सांत्वना थेरेपी सहारा बन के देते थे प्रेरणा थेरेपी अब आई है झापड़ थेरेपी उस पर रोना थेरेपी धै तेरे की।।