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Showing posts from October, 2026

जिसकी यादें जिंदा है,वह इंसान मरकर भी जिंदा है ।

ओ मैं इस मामले में काफी अभागा हूं कि 235 सदस्यों के NIT कुरूक्षेत्र के 1984 के बैचमेट में से सिर्फ दो के ही माता-पिता को जानने और आशीर्वाद लेने का मौका मिला। उनमें से एक अभिजीत नाहल के माता-पिता, जिनका मुझ पर आजीवन आशीर्वाद रहा।  दूसरे अनिल नेगी के माता-पिता से मुलाकात विद्यार्थी जीवन के दौरान नहीं, बल्कि कॉर्बेट नेशनल टाइगर रिजर्व के भ्रमण के दौरान हुई।          हम उस पीढ़ी में से हैं जो अभी भी कभी-कभार भ्रमण पर जाते हैं और किसी दोस्त के आग्रह है पर उनके घर में वास कर लेते हैं। ऐसे ही 2021 में मुझे 3 दिन रामनगर (उत्तराखंड ) में अनिल नेगी के घर पर रुकने का अवसर मिला और अंकल और आंटी से मुखातिब होने और आशीर्वाद लेने का अवसर प्राप्त हुआ।      आंटी जी (अनिल नेगी की माताजी) बहुत ही हाजिर जवाब, जिंदा दिल और विनोद से भरपूर व्यक्तित्व की धनी थी। आज जब उनके देहावसान का समाचार मिला तो सारे दृश्य और बातें फिर से आंखों के सामने उतर आये। आंटी जी में यह खूबी थी कि वह मेहमान को मेहमान महसूस नहीं होने देती थी, बल्कि कुछ ही मिनट में घर का सदस्य बन...