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८४ का ओजस्वी मूछों वाला

राजेश है बिजली वाला जिसका फोन एक रिंग में उठता है मेरी भी धारणा यही बन गई शायद रिंग में भी मीटर चलता है राजेश कैथल से आता है जो मेरे रास्ते में पड़ता है ज्यादा कुछ बोल नहीं सक...

एक अभियंता

अभियंता का चिंतन ड्राइंग पर आता ड्राइंग से डिजाइन बनाता डिजाइन जब फील्ड पर आती इसमें मानवता की कड़ी जुड़ती यहीं से अभियंता की प्राथमिकताएं शुरू होती। अभियंता एक सच्चा ...

हिन्दी

'ह' से है रंग हरा 'ह' से हैं सब हर्षित 'ह' का ही होता चिंतन 'ह' से ही है ये जीवन आधे' न' से चार ज्ञानेंद्रियां नाक, कान, आंख और रसना ऐसी ही है हमारी रचना 'द' में भाव है देने का 'द' ही प्रतीक है द...

4 वर्ष

जब बादल गरजें उमड़ - घुमड़ बरसात में लगता है तुम्हीं हो जब दोस्त मिले और चेहरे खिलें उस मिलाप की उमंग तुम्हीं हो जब किसी बुजुर्ग को सहारा कोई नौजवान दे उस सहारे की प्रेरणा ल...

म्हारी बधाइयां अर म्हारी उम्मीद - मनमोहनसिंहजी री राज्यसभा सीट पर निरबिरोध जीत

थां नै घणी घणी बधाइयां देवै परदेश रा लोग नै लुगाइयां म्हे था नै निरबिरोध जीतायां हां मान सूं म्हे जाणां म्हानै बडभागी जदै थे आया अठै बडे चाव सूं अबै थे बिराजोला बडी पंचाट म...

रेशनल ग्रुप: प्रथम वर्षगांठ पर

अरे !रेशनल ग्रुप ना कभी तू रहना चुप जगोटा की जाग से बांगा की बांग से उठ जाया कर देबू से रोज फूल नए मंगाया कर अगर महसूस हो गम युद्धि, विशु ,देबू कर देंगे कम फिर भी यदि ना हो कम आलोक,...

भैया मेरे

तुम्हारा पवित्र स्नेह है सूर्य की लालिमा में रोज देखा करती हूं नाश्ते के पहले कोर के स्वाद में रोज अपना बचपन महसूस करती हूं दोपहर के सूर्य के तपते तेज में रोज तेरा ही अक्स ...