बीत गई प्रथम चौथाई
इक्कीसवीं शताब्दी की
देख- देख चाल इसकी
आंखें रह गई फट्टी सब की
कम्प्यूटर आये, आईटी आई
आये बहुत ही स्मार्ट फोन
मशीनों को करें मशीनें ही नियंत्रित
मनुष्य तो रह गया लिपटे हुए फोन
रुपया शर्मा रहा देखकर डॉलर
दोनों ही डर रहे कि चीन है बोलर
पढ़ाई में गुण नहीं बचा
कोर्स हो गये चीज खरीदारी की
बेरोजगार ढूंढ रहे कोई
चाकरी खुद्दारी की
मिले कहां ऐसा वातावरण
जहां पर्चे बिकते माफिक तरकारी की
प्राइवेट में टिक नहीं सकते
अब छोटे काम धंधे
नुक्कड़ की प्रचूनी गायब
बड़े मार्ट में पंहुचते सब होकर अंधे
नकदी का व्यवहार बंद सा है
यूपीआई से चुकाते हैं बंदे
आटा भूल अपनाया डाटा
रिश्ते नाते सब हो गये टाटा
चौथाई में इतना देख लगता है
आधी तक गायब हो जायेगा
शायद अरावली का भाटा ।।
इक्कीसवीं शताब्दी की
देख- देख चाल इसकी
आंखें रह गई फट्टी सब की
कम्प्यूटर आये, आईटी आई
आये बहुत ही स्मार्ट फोन
मशीनों को करें मशीनें ही नियंत्रित
मनुष्य तो रह गया लिपटे हुए फोन
रुपया शर्मा रहा देखकर डॉलर
दोनों ही डर रहे कि चीन है बोलर
पढ़ाई में गुण नहीं बचा
कोर्स हो गये चीज खरीदारी की
बेरोजगार ढूंढ रहे कोई
चाकरी खुद्दारी की
मिले कहां ऐसा वातावरण
जहां पर्चे बिकते माफिक तरकारी की
प्राइवेट में टिक नहीं सकते
अब छोटे काम धंधे
नुक्कड़ की प्रचूनी गायब
बड़े मार्ट में पंहुचते सब होकर अंधे
नकदी का व्यवहार बंद सा है
यूपीआई से चुकाते हैं बंदे
आटा भूल अपनाया डाटा
रिश्ते नाते सब हो गये टाटा
चौथाई में इतना देख लगता है
आधी तक गायब हो जायेगा
शायद अरावली का भाटा ।।
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