आज पैरों में घुंघरू बंधे हैं
और सांसों में है सरगम
मन मयूर यूं नाच रहा है
जैसे लहरा दिया हो परचम
राज बस इतना है
कागज पर लिखते-लिखते
अब पहुंच गया मैं किताब तक
आसमानी कहानियों के संग
पाया अपना मील का पत्थर
अब पहुंच गया मैं बाजार
सोशल मीडिया से निकल कर।।
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