एक बार देखा था मैंने उसे
झेंपकर कहा था उसने
क्या देखते हो इधर ?
घबराहट में मैं भी भूल गया था
अपना कवित्व
झुका लिया था सिर
लानत है मेरा कविता लिखना
मैं नहीं शब्दों में पिरो सका
जिस रूप को
उसने आज हेयरकट को
नया अंदाज देकर
मेरी कविता पूरी कर दी
देखकर तस्वीर लोगों ने ही
मेरे मन की बात कह दी।।
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