जन्मदिन तुषार का
लाये खुशियों की बहार
जैसे बसंत लाती है
फूलों की बहार
कभी जिनके लिए
होता था खाने के हर
एक "कोर"पर इंतजार
आज है जिनके कदमों की
आहट की दरकार
तीस साल के महीने
गुजरे तीन सौ साठ
गणित के हिसाब से
अब फिर हो शुरुआत
सुना है आप रहते हैं
बर्फीले प्रदेश
अभी देश में चरम
पर है बारुद और आवेश
आ जाओ मिलने
चाहे बर्फ पड़े पिघलाना
हम हैं आतुर मिलने को
वहीं " रेक" के अंगना।
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