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मकरसंक्रांति

मकर संक्रांति ने लोहड़ी को भी  समेट लिया अपने आंचल में  खाकर तिल-मूंगफली उसकी चढ़ गये छतों पर पतंगों के जूनून में  दुकानें बंद करके लगे इस व्यापार में  दो-दो साल के बच्चे भी सीटी वाले जूते पहनकर लगे चरखी को लटाने में  लड़कियां बड़ी फुर्ती से पतंगें उड़ाते लगतीं  जैसे स्वयं ही पतंगें हो जिनका संतुलन  मानो किसी का पोनीटेल, किसी का चोटी में  पावर लाईने धागों से फाल्ट हुई पचासों बिजली वाले जुट गये पतंग बनकर हटाने में  रात हुई ड्रोन के माफिक गुब्बारों वाले पतंग  लगे शहर का आकाश सजाने में  नीचे सड़कों पर लोगों ने ऐसी की आतिशबाजी लगा शहर बंट गया है रंग-बिरंगी दीवारों में  बचे लोग नजारे ही देखते रहे दिनभर दबा दांतों तले उंगली  खाना तो बस आज पड़ा रहा अपने बरतनों में  यह शहर है गुलाबीनगर जनाब  रंग तो बसा है इसकी हर धड़कन में आतिशबाजी के शोर से शायद आज परिंदों ने बदल लिये ठिकाने इसीलिए आज उनकी बची रहीं जाने।।
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आजमाइश

यह जरूरी तो नहीं हम चाहें वह हो जाये लगे रहिए पूरी लगन से हो जाये चाहा तो अच्छा नहीं तो तब तक विचार बदल जायें तो और भी अच्छा इसे ही राह कहते हैं आजमाना जमाने से पहले खुद को अच्छा है।।

Things can't happen

Things can't happen  Only because you want Their is neither place  for stubbornness  Nor for insistence  If Love or like  borns in both hearts It neither requires words Nor needs saying arts It only happens  When one's heart in another's deepens.

उपयोगिता

बेकार कुछ नहीं होता बस वक्त के साथ थोड़ी उपयोगिता बदल जाती है  कभी कमाता था बापू तो मालिक कहलाता था  लेकिन संरक्षक तो अब भी है  उसी तरह अंडरवियर भी नहाकर सबसे पहले पहना जाता है  खराब होने पर वही सबसे बाद में  जूते साफ करने हेतु याद आता है।

स्वर

कहने से एक सुने स्वर‌‌ से‌ मोहित जग शब्द समझें ना समझें स्वर समझे अबोल।।

सुस्वागतम 2026

पांच का छोटू उतारे फोटू

कुछ चीजें आज भी नहीं बदली हैं या कहें कि सिद्धांत: बदलना नहीं चाहती हैं  वे चीजें मुझे अजीज हैं  जोड़ती जो मुझको अपनों से  दिलातीं हैं विश्वास कि नहीं बदलते  अपने अपनी कीमत वक्त के साथ बस कलेवर थोड़ा छोटा हो जाता है  जैसे आदमी का उम्र के साथ  जब से पकड़ी समझ मिलता था छोटा पैक पांच रुपये में  आज लाया वही छोटू पांच रुपये में  हर्षाया दिल पाकर स्वाद जो अभी है बचपन से जेहन में कोई रखता था तैयार इन्हें  सजाकर प्लास्टिक के डिब्बे में  जगह होती थी कस्बा एक छोटा मरुस्थल के टिब्बों में।। # My Parle G Biscuit